
एक बड़ा सबक भी है कोविड-19 वर्ष 1994 की बात है। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में एमएससी ( मास कम्युनिकेशन ) पाठ्यक्रम शुरू हुआ ही था। क्योंकि पूरे हरियाणा में पत्रकारिता में स्नातकोत्तर स्तर का यह अकेला पाठ्यक्रम था अतः इसमें एडमिशन के लिए खूब मारामारी हुई। इसके लिए प्रवेश परीक्षा निर्धारित की गई। मैंने भी इसमें अप्लाई कर दिया था। पढ़ाई में फिसड्डी होने के बावजूद चयन सूची में मेरा नाम सातवें नंबर पर आ गया। यह पता लगने पर , मैं कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय परिसर में स्थित एडमिशन फीस के लिए निर्धारित बैंक में फीस जमा कराकर वापस घर आ गया। इस दौरान मुझसे एक बड़ी चूक हो गई। मैंने बैंक में फीस जमा करवाने के बाद उसकी रसीद विश्वविद्यालय के मास कम्युनिकेशन विभाग में जाकर जमा नहीं करवाई। उस समय एडमिशन और फीस ऑनलाइन नहीं थे। इसके चलते मास कम्युनिकेशन डिपार्टमेंट को इसकी सूचना नहीं मिली। अतः मेरी जगह किसी और का एडमिशन कर दिया गया। एडमिशन्स का दौर पूरा होन...